श्रील प्रभुपाद के हिंदी में प्रवचन  »  720216R1-MADRAS_Hindi
 
 
श्रील प्रभुपाद के हिंदी में प्रवचन
 
वार्तालाप
मद्रास, 16-फरवरी-1972
 
 
 
[Opening]
(The lecture begins with Srila Prabhupada addressing the audience about the importance of chanting the holy name.)

[Paragraph 1]
शाम को, सवेरे, आधा घंटे, आधा घंटे। आखिरी काम, शास्त्र का निर्देश है—"हरे नाम, हरे नाम, हरे नाम..."। लोग का पिता विजय है। आप लोग को भी कहते हैं, निवेदन करता हूँ और प्रिय लाभ उठाइए, बढ़िया।

[Paragraph 2]
आपका कुछ प्रश्न है?
"कि जो काम आदमी करता है, वो भगवान करता है? मतलब इसको भेद है, ये भी तो भगवान कराता है। हरे कृष्ण बोल रहा है, इसको क्यों नहीं बोलते?"

नहीं, नहीं, मैं आपके question का answer चाहता हूँ कि जो आप कार्य करते हैं, वो भगवान कराता है।

देखिए, वो जो jail superintendent है, वो जबरदस्ती वो जो कैदी [काय] है, उसको काम कराता है कि नहीं? बोलिए। हाँ, तो वो करता है ना? वो कर रहा है। Jail superintendent का क्या जरूरत है? उसको बोलता है, "मैं तो मारेगा थप्पड़!" वो jail superintendent कराता है ना, वो करता है? आपका बोलिए, इसका जवाब दीजिए।

"मैं तो आपको follow नहीं करता।"

नहीं, देखिए। जो jail superintendent है, वो खड़ा हो के एक आदमी को बोलता था, "खोद [खो] इसको खोद [खो], नहीं तो लाठी लगा।" तो उसको कराता है ना, वो करता है? वो ऐसा कुछ काम किया है जो जंजीर से [जेंस] बाँधकर वो काम कराना पड़ता है। वो तो बात ठीक है, वही बात है।

[Paragraph 3]
आप कुछ काम ऐसे कीजिए जिसके फलस्वरूप आपको काम और कुछ करना पड़ेगा। वो भगवान कराता है, और भगवान का agent [एज] कराता है। यह नहीं है कि भगवान एक आदमी को बोलता है, "तू चोरी कर" और एक आदमी को बोलता है कि "तू साधु हो जा।" ये बात नहीं है।

जो चोरी किया था, उसको बोलता है, "आओ, तू चोरी कर" और "तू, उसको पीटा जाए खूब अच्छी तरह से।" नहीं तो फिर उसका कौन बचना [बचपन] हुआ? आदमी का बचना [बचपन] तो वही हुआ। तुम चोरी किया, तभी तो तुमको भुगतना/खाना [ख्वाना] पड़ता है। जो चोरी नहीं किया है, उसको नहीं पड़ता [पढ़ते]।

[Closure]
[संगीत]
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥