अतिथि: आपका तो दर्शन हुआ। हां, यहां आया था मैं आपसे मिलने के लिए। कई साल हो गए। फिर आपके जहां-जहां center हैं, सभी जगह मैं जाता हूं और मुझसे जो मदद बनती है...
श्रील प्रभुपाद: कहां-कहां?
अतिथि: Mombasa में, मशियल में और New York में भी वाले मिल गए मुझको। अपना ashram हरिद्वार में है।
श्रील प्रभुपाद: अच्छा।
अतिथि: अच्छा तो अभी थोड़े दिन पहले स्वामी Brahmananda जी आए थे और... के जो in-charge रहे थोड़ी देर तक... कब आया था?
अतिथि 2: तीन-चार महीने पहले।
अतिथि: तीन-चार महीने पहले, तीन-चार मास को। क्योंकि हमको दो मास हो गया बाहर निकले हुए। Brahmananda... मेरा हाथ का जी, जो वहां भी Mombasa के in-charge...
श्रील प्रभुपाद: हां, तो India में तीन-चार पहले हमसे मिले नहीं?
अतिथि: तो जरूर मिले। आपको नहीं है... हम लोग के नंबर नहीं... आपके शायद हो सकता है मैं नाम भूल रहा हूं। Brahmananda नहीं होगा, वो चाय वाला होगा।
श्रील प्रभुपाद: चाय वाला? हां, कोई ऐसा नाम...
अतिथि: नहीं थे, तो school का आए थे।
श्रील प्रभुपाद: हां, तब तो Brahmananda... मैं उनको अच्छी तरह जानता हूं क्योंकि मेरे प्रवचन में Mombasa रोज आते रहे और मैं भी उनके वहां गया था। कुछ-कुछ व्यवस्था करानी थी, उन्होंने कहा कि आप यहां के भक्तों को कहिए, तो हमसे जो सेवा बन पड़ी तो मैंने सबके लिए कराया था। मैं पहचानता हूं। वो bus ले आए थे।
अतिथि: bus ले... उसका भाई है, बंधु। तब दोनों एक जैसे ही लगते हैं, दोनों ही हैं। मोटा-छोटा है। अभी तो आप विराजेंगे यहां London में?
श्रील प्रभुपाद: नहीं, अब बाजी... तबीयत ठीक नहीं है, खाली जुखाम है बस।
अतिथि: आपने तो बड़ा उपकार किया संसार का। पश्चिम में फिर से पौवाद संस्कृति को लाना बड़ा कठिन काम है। बहुत ही नियम से सब लोग रहते हैं। हमारा भी यहां उत्सव बहुत बड़ा हुआ गुरु पूर्णिमा का, करीब 9,000 लोग आए थे Alexander Palace में, अभी 11 July, बहुत बड़ा है। हम लोग भी कुछ सोच रहे हैं यहां एक छोटा ashram बनाने की बात और हम चाहेंगे कि हम आपके पूरक बनें और आपकी संस्था हमारी पूरक बने। परस्पर मिलके काम हो तो संसार में ज्यादा अच्छा हो सकता है।
श्रील प्रभुपाद: ये हम लोग का जो प्रचार है—"कृष्णस्तु भगवान स्वयं"—ये तो मानते थे? ये बोलता है sectarian, क्यों जी? इनका तो उद्देश्य है खाली Krishna ही भगवान होगा। हमारा भगवान है, ये भगवान है, वो भगवान है, सब भगवान—ये तो हम लोग नहीं मान रहे।
अतिथि: हूँ। Krishna भगवान... इसमें सहमत नहीं होता है।
श्रील प्रभुपाद: हां, थोड़ा सा तो अंतर पड़ जाएगा। फिर हम लोग कैसे मिलें? बोले, जहां मिलने की जगह है वहां मिल जाएंगे।
अतिथि: नहीं हो सकता है। वो हद सब इधर-उधर जाएंगे। सब भगवान हैं, हम कैसे मान लेंगे? भगवान का... नहीं तो हम अपनी सारी संस्कृति के जो और इधर भगवान हैं... पंचदेवोपासना जो है, देवोपासना...
श्रील प्रभुपाद: वो तो मूर्ख है। ये कह सकते हैं। शास्त्र बोलता है—"काम जज अन्न देवता जो अन्न देवता का भजन करता है तो मूर्ख है"।
अतिथि: नहीं देखिए ना, देवी भागवत है, है सब ठीक है। भजन मना नहीं है, बाकी जो भजन करने वाला है वो मूर्ख है, ये बात... भजन तो मना नहीं है, मेन में है। तो भगवान ने भी यही तो कहा है कि "न बुद्ध भेद ज्ञानम..."
श्रील प्रभुपाद: वो दूसरी बात, वो दूसरी बात है। क्यों? आप बिगड़ जाएं, इसलिए कुछ बोला नहीं। बाकी बात ये है...
अतिथि: और जो बड़े-बड़े विद्वान हैं, करपात्री जी वगैरह, अगर आप उनसे बात करेंगे तो वो आपके सिद्धांत का पूरा खंडन कर सकेंगे।
श्रील प्रभुपाद: नहीं, खंडन... सब कर चुका है वो। बाकी बहुत ही अच्छा है, जितना आप कर रहे हैं, इससे अच्छा और कुछ हो... नहीं, हम तो इतना ही समझते हैं कि भाई, भगवान को नोट लें। भगवान कृष्ण स्वभाव का... तुमको भगवान चाहिए, तो जब भगवान को दिया जाता है तो खाली आते भगवान... ये मुश्किल होता है। बाकी हम लोग compromise नहीं करना।
अतिथि: कोई बात नहीं। हां, हम लोग को यही बोलेंगे, कर तो अच्छा ही है ना। Krishna... दूसरे देवता का भजन हम लोग मना नहीं करते, ये बात नहीं। उसका अपमान भी नहीं करते, ये बड़ा अच्छा...
श्रील प्रभुपाद: इतना ही काफी है। हम लोग सब देवता का मंदिर में जाते हैं, नमस्कार करते हैं। जिसको जितना सम्मान है, तो देंगे।
अतिथि: हां, और क्या।
श्रील प्रभुपाद: चैतन्य महाप्रभु कहते हैं—तृणादपि सुनीचेन... साधारण चींटी को हम लोग सम्मान देते हैं, और जो बड़े-बड़े देवता हैं उनका सम्मान नहीं? Krishna संपर्क में, जैसे दुर्गा देवी हैं, उनका हम लोग पूजा करते हैं। और किस तरह से? "सृष्टि स्थिति पल साधन शक्ति रेखा छाई भानी विभक्ति दुर्गा..." दुर्गा तो साधक नहीं है। "सृष्टि स्थिति पल साधन शक्ति रेखा, सृष्टि स्थिति पल साधन शक्ति रेखा छाई इच्छु चे..." वो जो 'सा' है, independent नहीं है। "इच्छा रूप माया प्रकृति..." ये हम लोग... और ये लोग कहते हैं जो जैसे दुर्गा है, जैसे काली है, और जैसा Krishna है, और जैसे वो है, वो है, सब और हां है...
अतिथि: तुम ये ठीक है...
श्रील प्रभुपाद: ये मालिक है Krishna, और लोग सब चाकर हैं। छोटा-बड़ा लोग सब चाकर, छोटा-बड़ा होता है।
अतिथि: ये लोग मानते हैं, अपनी मान्यता है, ठीक है।
श्रील प्रभुपाद: नहीं, शास्त्रीय है। भगवान खुद बोल रहे हैं। किन्तु हम लोग मूर्ख हैं, उसी को मानते हैं ज्यादा। शास्त्र हम लोग नहीं... जितना भगवान बता देते हैं, बस हो गया काम। उसी में काम हो रहा है। इसमें भगवान जब खुद बोल रहे हैं—"मत् परम न्य सूत्र..." फिर हमको दूसरा बात में जाने... सम्मान तो देंगे सभी को, बाकी जो भगवान है, षड्-ऐश्वर्यपूर्ण भगवान, Krishna... Krishna अवतार में भी भागवत में बताया—"कृष्णस्तु भगवान स्वयम्"। और जो भगवान का अवतार है, कोई अंश है, कोई कला है। बाकी जो पूर्ण शरीर शब्द, पूर्ण भगवान, वो तो Krishna हैं। और हरे राम में आप बलराम जी को मानते हैं?
अतिथि: नहीं, राम का अर्थ होता है भगवान। तो आप बलराम लीजिए, राम लीजिए, उसको... "योग सत्यानंद रामना पर..."
श्रील प्रभुपाद: दशरथ को नहीं मानते?
अतिथि: क्यों नहीं? ये सब ये लोग बोलते हैं...
श्रील प्रभुपाद: अभी हमारा Mumbai में जो मंदिर हो रहा है, भगवान रामचंद्र होगा। फिर क्या? राम, लक्ष्मण, जानकी... "रामाना कृष्ण संगमा परम, रामाना कृष्ण संगमा परम..." "परम ईश्वर परम कृष्ण सच्चिदानंद..." तो भगवान, पूर्ण भगवान। और अर्जुन भी महाराज—"परम ब्रह्म परमधाम पवित्र..." कोशिश हो रहा है जो भगवान, भगवान Krishna हैं और उसका भजन कर रहा, कोई मुश्किल नहीं है। "मन मना..." सब कोई कर सकता है, कोई मुश्किल नहीं है। बड़े विद्वान भी कर सकता है, मूर्ख से मूर्ख जो है, भगवान को नमस्कार करना कोई मुश्किल...
अतिथि: माम्... ये संप्रदाय... 15 दिन... हां, कितना दिन इधर?
श्रील प्रभुपाद: मैं एक मास से था, अभी 15 days और। अच्छा, Leicester में मेरे कार्यक्रम 8 दिन हुए और यहां 10 दिन हुए। Town Hall में लगभग 4,000 लोग रोज आते थे। और फिर ये कार्यक्रम हुआ गुरु पूर्णिमा का, इसमें...
अतिथि: गुरु पूर्णिमा के दिन हमारा उधर यात्रा हुआ New York में।
श्रील प्रभुपाद: हां, तो हुआ 10-12 आदमी Hindu, Muslim... Muslim तो कहीं जाते हैं, उनको... उनको लाने का प्रयत्न करिए महाराज। बहुत मुसलमान थे, शायद Iran में मंदिर... अच्छा, वो उसका नाम था अतरिया... अच्छा, उसका नाम कर दिया अत्रि ऋषि, अत्रि ऋषि। अच्छा, यहां भी एक है... सागर... एक motor accident death हुई, एक professor... तो वो... वो जो कुंड वगैरह लगाने लगे... हमारा तो शर्त है, जो disciple बनेगा उसको तो चार चीज़ पहले—स्त्री-संग और मांस, ये अंडा, ये सब छोड़ना पड़ेगा। और नशा, शराब आदि तो छोड़ना ही पड़ेगा, चाय भी छोड़ना पड़ेगा, बीड़ी भी छोड़ना पड़ेगा। ये शर्त जो मानेंगे, उसका भी... हमारा disciple कोई चाय पीते नहीं, इसीलिए तो हमारा मुश्किल...
अतिथि: आपके तो बहुत हैं शिष्य।
श्रील प्रभुपाद: हां, 10,000 disciple हो गए। आपने काम थोड़ी... चाय है, चाय नहीं। हमारे घर में सब भोजन बनता है, चाय नहीं।
अतिथि: हम जब हरिद्वार पधारे, तो आप अपने मंत्री जी से सूचना दिलाएं। हम लोग भी अपने ashram में आपका स्वागत...
श्रील प्रभुपाद: अब तो जी कम हो रहा, 80 years हो गया। और 102 जगह में center है। दो-तीन जगह एक वर्ष पूरा हो जाता है, एक center में दो दिन, तीन दिन पड़ा। 365 days में रास्ते में निकल जाने... बाकी ये लोग सब, ये America बालक लोग बड़ा सहाय कर रहे हैं हर तरह से। ये सब किताब छपने के लिए जी, कितना लाखों-करोड़ किताब को daily 6,000 का किताब... अभी हिंदी में मेरे लिए... Spanish, Portuguese, Chinese, Japanese और English है। और सब किताब minimum 6,000 तक... आज्ञा देंगे।
अतिथि: बहुत मेहरबानी भैया, किताब... आइए, अब कल... अब जब आप भारत पधारेंगे तो मुंबई से आपको ले...
श्रील प्रभुपाद: Just have to listen when you know...
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥