श्रील प्रभुपाद: "ध्यायः कृते यद्विष्णुं..." त्रेता युग में बड़े-बड़े यज्ञ साधन करते हैं, और द्वापर युग में परिचर्या, मंदिर में अर्चन, और "कलौ तद्धरिकीर्तनात्"—कलयुग में वही साधन सिद्ध हो सकता है केवल संकीर्तन द्वारा। इसलिए केंद्र खोलना है, माने मंदिर खोलना है।
तो मंदिर में आस्ते-आहिस्ते आदमी का, क्या नाम, आकर्षण कमती हो जा रहा है। क्यों? क्यों सिखाया जाता है—"God कुछ नहीं है मंदिर में, मंदिर जाने की क्या जरूरत है?" बहुत समाज हो गया, मंदिर में बोलता है, "पत्थर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहाड़।" ये सब बोलता है। जो ये "पत्थर पूज के क्या होगा?"—यह propaganda है ना? आर्य समाजी लोग भी propaganda करता है—"मंदिर में क्यों जाते हो? मंदिर में क्या रखा है?" तो आदमी तो मूर्ख होता ही है। "पंच बोले तो भूत भागे"—पाँच आदमी propaganda कर दिया तो समझ जाता है। साधारण मनुष्य क्षुब्ध होता है जो जानता नहीं, इसलिए मंदिर का प्रभाव कमती होते जाता है सब जगह में, यहाँ नहीं, बाहर में भी।
[गला साफ़ करने की आवाज़] Church में कोई नहीं जाता है। Church सब बिक रहा है। हम लोग बहुत से church खरीद लिया है मंदिर बनाने के लिए। लंदन में तो हजार अच्छा-अच्छा church बहुत...
वार्ताकार: "आपका हेतु क्या है ये family बनाने में?"
श्रील प्रभुपाद: "कोई है जो आदमी सब भगवान को भूल करके जहन्नुम में जा रहा है, इसको बचाना है।"
वार्ताकार: "जहन्नुम में जाते आप कैसे बचाओगे?"
श्रील प्रभुपाद: "यही कीर्तन से।"
वार्ताकार: "अभी मंदिर से कीर्तन में जाना मानते हो?"
श्रील प्रभुपाद: "हाँ, कलयुग का साधन है। 'कलौ तद्धरिकीर्तनात्'। वही तो पहले समझाया जो 'कृते यद् ध्यायतो विष्णुं त्रेतायां यजतो मखैः। द्वापरे परिचर्यायां कलौ तद्धरिकीर्तनात्'—कलयुग में हरि कीर्तन द्वारा वो साधन सिद्ध होता है।"
वार्ताकार: "अभी आपने बताया कि propaganda है। propaganda से सब कुछ होता है। लोग पत्थर को क्यों पूजते हैं? ऐसा भी, ऐसी हवा भी होती है। आपका यह propaganda है, इसमें भी यह एक propaganda से एक काम होता तो ये और काम होगा, counteract होगा। आपके followers कितने होंगे?"
श्रील प्रभुपाद: "हरे कृष्ण सब follower तो हम जानते हैं। इंडिया में सभी हैं इसमें। कौन हरे कृष्ण मंत्र नहीं जानता? हरे कृष्ण को तो सब कोई जानते हैं।"
वार्ताकार: "वही तो propaganda है। आज क्या?"
श्रील प्रभुपाद: "Propaganda हमारे तो 'हरे कृष्ण आंदोलन' कहा जाता है। बाहर में हम लोग को 'Hare Krishna People' कहता है। तो इंडिया के बाहर में ये propaganda नहीं था, अभी शुरू हुआ है। और नहीं तो हमारे इंडिया में तो है, गाँव-गाँव में हरे कृष्ण मंत्र का सब चलता है, बाकी उसका guidance ठीक नहीं है।"
वार्ताकार: "परदेश में कहाँ-कहाँ आपका...?"
श्रील प्रभुपाद: "और देश में? हमारा सारा पृथ्वी में 102 केंद्र है। अमेरिका में 40 है, और यूरोप में कोई 20 है, कनाडा में पाँच है, जापान में तीन है, ऑस्ट्रेलिया में पाँच है, न्यूजीलैंड में एक है, इंडिया में चार है। ऐसी जगह-जगह।"
वार्ताकार: "इंडिया में कौन सी-कौन सी जगह?"
श्रील प्रभुपाद: "इंडिया में? बॉम्बे में है, कलकत्ता में है, वृंदावन और नवद्वीप... मायापुर, नवद्वीप। हैदराबाद, now we have in Hyderabad. Hyderabad, that is not established, but we have got land in Hyderabad. [गला साफ़ करने की आवाज़] Somebody has donated some..."
वार्ताकार: "अहमदाबाद का प्रोग्राम का मायना क्या है? अहमदाबाद में आपका जो प्रोग्राम है, हाँ, उनका मायना क्या है? इधर कोई खास mission पे आए?"
श्रील प्रभुपाद: "अहमदाबाद में mission वही है—हरे कृष्ण।"
वार्ताकार: "यहाँ सब लोग के दिमाग में एक बात चल रही है, हाँ, कि ये भगवान कृष्ण, वो इंडिया में थे, इंडिया के थे, और वो foreign वाले यहाँ 'हरे कृष्ण, हरे कृष्ण' करके..."
श्रील प्रभुपाद: "तो मूर्ख लोग कहता होगा, कोई जानने वाला नहीं बोलता है।"
वार्ताकार: "और एक दूसरी हवा ऐसी है जो..."
श्रील प्रभुपाद: "एक-एक हवा [गला साफ़ करने की आवाज़] निकाल दीजिए, फिर हवा बजा दीजिए। एक हवा बताया है, उसको समझ लीजिए। जो कहता है कि कृष्ण इंडिया का है, वो कृष्ण को जानता ही नहीं, ना तो भगवत गीता पढ़ा भी होगा। कृष्ण कहते हैं: 'सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः। तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता॥' वो भगवान कहते हैं, कृष्णा, जो सब योनि में, 84 लाख योनि में जितना मूर्तियां हैं, सबके माताजी हैं ये material nature, और 'मैं उनका पिता हूँ।' जन्म होने का दो ही होता है—माता-पिता। तो भगवान बताते हैं कि 'मैं उनका पिता हूँ' और ये जड़ जगत जो है, माँ। तो इंडिया का कैसे हो गया कृष्णा? जब कृष्ण सबको claim करता है, 'सबके पिता मैं हूँ', तो केवल इंडिया का कैसा हो गया?"
वार्ताकार: "उनका जन्म तो [गला साफ़ करने की आवाज़] मथुरा..."
श्रील प्रभुपाद: "अरे, ऐसा तो सूर्य उदय आप देखते हैं सवेरे। आपका देश... सूर्य, सूर्य क्या आपका देश का हो गया? आप सारी देखते हैं सूर्योदय पूर्व से, आपका देश का पूर्व से उदय हुआ।"
वार्ताकार: "मगर कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ, वो तो... मगर वो है क्या? Sun shining throughout the world, while Krishna worked only in India."
श्रील प्रभुपाद: "No, Krishna, Krishna spread all over the world."
वार्ताकार: "What, all over the world?"
श्रील प्रभुपाद: "भगवत गीता, भगवत गीता सारी दुनिया में पढ़ते हैं।"
वार्ताकार: "वो बात अलग है।"
श्रील प्रभुपाद: "तो वो आपका जो प्रश्न है ना, कृष्ण मथुरा में उदय हुआ, उसका ही तो जवाब हम देते हैं कि पूर्व दिक से सूर्य का उदय होता है, इसका मतलब नहीं है कि जो पूर्व दिशा जो है, वो सूर्य का पिता हो गया, माता हो गया।"
वार्ताकार: "ये hippy लोग हैं, वो भी 'हरे राम, हरे कृष्ण' करते-करते वो सब अपनी-अपनी activities करते हैं। आप उनको कहाँ तक..."
श्रील प्रभुपाद: "यही तो है, जो hippy लोग करते हैं, आप लोग नहीं करते। आप, हम नहीं करते। Hippy लोग पीते-पीते भी हरे राम का नाम लेते हैं, तो ये तो हरे राम तो सबके लिए है, आपके लिए भी है। कि hippy भी करता है, आप नहीं करते। Hippy जितना नीच है, वो करता है, आप नहीं करते—ये उसका मतलब निकलता है।"
वार्ताकार: "तो economics में नियम है demand और supply का..."
श्रील प्रभुपाद: "नहीं, हरि नाम ऐसी अच्छी चीज़ है, hippy जैसा नीच है वो भी करता है, तो हम उससे भी नीच हो गए, ऐसा है ना? वो भाई बताते बराबर हैं, जो पाप करता है उसको भगवान... वो भगवान को याद करता है, जो नहीं करता है उसको कुछ भी नहीं है, ऐसे भी... ऐसा आप लोग समझते हैं कि आप लोग पाप नहीं करते हैं, तो आप लोग पागल होगा और कुछ कारण बता दें..."
श्रील प्रभुपाद: "जैसे, जैसा आपने बताया कि hippy लोग बोल रहे हैं, हम बताते हैं कि जो hippy लोग करते हैं, आप लोग नहीं करते हैं, तो आप hippy से भी नीच हैं। Hippy लोग भी कर लेता है इतना पापी होते हुए, उससे भी नीच हैं। हम तो ऐसा मानते हैं।"
वार्ताकार: "कि आप लोग... आप मानिए, बाकी बात यही है, किसी के नीच बोलने से वो ऊपर उसे उलट के नहीं उठाया जाता..."
श्रील प्रभुपाद: "नहीं, आप क्यों hippy... आप hippy को क्यों नीच मानते हैं? आप hippy को क्यों नीच मानते हैं?"
वार्ताकार: "Hippy लोग करते हैं तो हमने कहाँ बोला..."
श्रील प्रभुपाद: "आप, आप hippy लोग... ये कहने का मतलब ही है जो ये चीज़ hippy लोगों के लिए है। आपके कहने का मतलब ये कोई अच्छा आदमी नहीं करता, hippy लोग करता है। हमारा कहने का मतलब ये है कि hippy लोग नहीं कर रहे हैं, ये तो सबके लिए है। Hippy करता है, आप भी कीजिए। ये तो सबके लिए है। Hippy करने से उसका दोष क्या है?"
वार्ताकार: "नहीं, उसको पूछने का ज़रूरत क्या है? बताया नहीं, सिर्फ ऐसा बोला कि हिप्पी लोग ऐसा बताया..."
वार्ताकार 2: "कहने का तात्पर्य यही है कि कई लोग 'हरे कृष्ण, हरे कृष्ण' का नाम लगाते हैं और बुरा काम करते हैं। यही बात है।"
श्रील प्रभुपाद: "बुरा काम कौन नहीं करता?"
वार्ताकार: "यहाँ follow नहीं... यहाँ नहीं, लोगों का ख्यालात ये है जो 'हरे कृष्ण हरे राम' जो यहाँ picture जो भी चली थी, उसमें जो बताया है, इसी तरह यहाँ के लोगों में..."
श्रील प्रभुपाद: "वो तो bad propaganda किया।"
वार्ताकार: "नहीं, लोगों में ख्याल है कि जो भी..."
श्रील प्रभुपाद: "तो होगा, propaganda होने से... वो जैसा देवानंद picture बताया है कि hippy लोग... ये तो उसको कहने दीजिए, उसके लिए क्या हमारा movement बंद हो जाएगा? हम ऐसा नहीं कहते।"
वार्ताकार: "लोग ये मानते हैं..."
श्रील प्रभुपाद: "लोग तो ज्यादा मूर्ख होता है, और एक मूर्ख और उसको सिखाता है मूर्ख होने के लिए, तो मैं क्या करूँ? लोग मूर्ख होते हैं। मूर्ख यदि भारतवर्ष में इतना ही आदमी मूर्ख हो गया कि ये जो देवानंद picture निकाला है, ये hippy लोगों के लिए कि हरे कृष्ण मंत्र क्या है? भारतवर्ष में सब बड़े-बड़े आचार्य लोग हरे कृष्ण मंत्र गान करते हैं, वो लोग hippy हैं क्या? Hippy लोग करते हैं, उसका सौभाग्य है, और हम लोग नहीं करते हैं, यही हमारा कहने का मतलब है। Hippy, hippy का नाम लिया जाता है जो society से कोई बहिष्कृत चीज़ है, तो वो भी हरि नाम करते हैं, हम लोग नहीं। ये कहने का मतलब। वो जब कर सकता है, आप लोग नहीं क्यों कर सकते? आप भी कीजिए।"
वार्ताकार: "हम करें, नहीं करें, इससे कोई मतलब नहीं।"
श्रील प्रभुपाद: "फिर उसका बात क्यों लाते हैं?"
वार्ताकार: "नहीं, उसका बात इतने लिए, इसके लिए लाते हैं कि लोग ऐसा मानते हैं..."
श्रील प्रभुपाद: "कि लोग का है... लोग का representative तो आप हैं, इसलिए तो आप कह रहे हैं।"
वार्ताकार: "नहीं साहब, देखो स्वामी जी, एक तो प्रश्न है कि जो लोग... लोगों के दिमाग में जो छाप है, वो तो आपके समक्ष रजू करना चाहिए, इससे..."
श्रील प्रभुपाद: "नहीं, नहीं, हमारा कहने का मतलब है जो hippy लोग अगर हरि नाम किया तो उसमें क्या दोष हो गया?"
वार्ताकार: "दोष की बात नहीं है, यहाँ तो लोगों का ख्याल ऐसे जम जाता है..."
श्रील प्रभुपाद: "लोगों का ख्याल... लोगों को avoid करना चाहते हैं, वो तोड़ना चाहते हैं जो ये चीज़ कुछ नहीं है लोग के लिए। हमारा... नहीं, हम तो advanced हैं, हमारा... हमें ये चाहिए, हम वो दोषी थे, वो नीच हैं, ऐसा हम नहीं कह सकते।"
वार्ताकार: "नहीं, उसका विषय पूछने का कुछ मतलब तो होता है ना..."
श्रील प्रभुपाद: "तो hippy के लिए क्यों पूछते हैं आप?"
वार्ताकार: "हमने इसके लिए पूछा कि लोग ऐसा मानते हैं। आप पहले हमें समझ लो एक मिनट। लोग ऐसा मानते हैं कि ये जो 'हरे राम हरे कृष्ण' के नाम लेकर ये जो hippy लोग करते हैं, तो उससे क्या असर पड़ती है लोगों पर?"
श्रील प्रभुपाद: "वो असर आपको देखने, नजर में नहीं आता है? क्या? Suppose ये लोग hippy था, अब क्या है ये? ये सब hippy थे। मान लीजिए आपको बोल रहा है कि hippy लोग हरे कृष्ण बोलता है, समझ लीजिए ये लोग सब hippy थे। अब हरे कृष्ण बोल के stage में आया, तब क्या आप देख रहे नजर में नहीं आता? सामने नजर से देख लीजिए। मान लिया hippy लोग ही हैं ये, अब नजर में क्या आता है? हम तो ये कहते हैं कि आपका विचार हो रहा है बाहर, हम... हमको, आप हमको क्यों पूछते हैं? आप नजर से देख लीजिए ना, आपका आँख है तो देख लीजिए क्या होता है। मान लिया ये लोग... फिर भी होता ही है, 'पापी तापी जत छिलो, हरि नामे उद्धारिलो', चैतन्य महाप्रभु का movement है, जितने पापी-तापी आए उसको उद्धार करना। तो समझ लीजिए ये लोग hippy ही थे, अब नजर लगा के देख लीजिए ये लोग क्या हैं।"
वार्ताकार: "So according to you, this Hare Krishna movement has nothing to do with the hippy movement?"
श्रील प्रभुपाद: "Yes, it can improve anyone. It can [turn] anyone [even] the hippy, that is Hare Krishna."
वार्ताकार: "Are you doing any social service or social...?"
श्रील प्रभुपाद: "This is the best social service. If you consider them hippy, they have given up everything. Is this not social service? The Government of America is spending millions of dollars to stop this LSD, but anyone who comes to me, he immediately gives [it up]. Is it not social service? The best social [service]. क्या आप लोग की क्या राय है, जो millions of dollars खर्च करके उसको LSD हटा नहीं सका, और हरे कृष्ण नाम जप करके हमारे पास आ के LSD छोड़ दिया, is it not social service? What do you think?"
वार्ताकार: "One side, the other side you can do..."
श्रील प्रभुपाद: "Why you entrust all the sides upon me? Why you are there? At least I am doing one side. Don't you give me any credit for this?"
वार्ताकार: "आप जैसे को तो credit की ज़रूरत ही नहीं रहती है।"
श्रील प्रभुपाद: "तो फिर क्या करें? आप जो करते हो बराबर है, आपको credit की ज़रूरत... फिर आपसे हमको पूछने का कोई ज़रूरत ही नहीं है। हमारे कुछ तो ज़रूरत ही नहीं है।"
वार्ताकार: "आपके... आपने गुजरात में कुछ काफी मंदिर की मुलाकात... द्वारका और डाकोर के... और अच्छा, जो इंडिया का जो problem है, poverty है, वो poverty के बारे में आपकी movement कैसे helpful होगी?"
श्रील प्रभुपाद: "Poverty पहले नहीं था क्या?"
वार्ताकार: "तो हम नहीं जानते, हम तो..."
श्रील प्रभुपाद: "हम तो जानते हैं, हमारी उम्र तो ज्यादा है, हम तो जानते हैं। हम जब बम्बई जाते हैं, इनको दिखाते हैं, 'देखो जी, ये फुटपाथ में जो लेटे हुए हैं, 50 वर्ष पहले मैं यहाँ था, ये फुटपाथ में लेटने वाला उस समय भी था।' और उस समय चावल का कीमत था दो आना सेर, अब ₹2 है। खा करके तो ₹2 वाला चावल तो खाता है, इसका income तो बढ़ गया है ज़रूर। फिर फुटपाथ में क्यों लेटे?
तो इसका कोई solution... इसका solution दुनिया में ही रहेगा, खाली आपके देश में नहीं। आप पश्चिम देश में जाइए, अमेरिका में जाइए, यूरोप में जाइए, वो फुटपाथ में सोने वाला बहुत मिलेगा। लंदन में बहुत मिलेगा। लंदन में Bedford Park में हम जब सवेरे morning walk करने जाते, बहुत हैं लेटे फुटपाथ में, कागज ओढ़ के लेटे हैं। क्या उसके पास पैसा है नहीं? क्या तो उसका background... English nation, British Empire, वो क्यों फुटपाथ में लेटे हैं, उसका क्या जवाब है? और उसको खुशामद किया जाए तो, 'काहे फुटपाथ में लेटे हो? आओ, तुम्हारा मकान इधर बना देते हैं।' नहीं जाता। इसका क्या जवाब है? बोलिए।"
वार्ताकार: "ऐसा शौक होता है।"
श्रील प्रभुपाद: "वो तो शौक में भी तो गरीब होता है। तो गरीब वाला तो रहेगा, चाहे शौक से हो, चाहे force से हो, वो चीज़ है। ये nature का नियम है। कोई कहेगा हम शौक से गरीब बना है, कोई कहेगा हम force से बना है, बाकी गरीबी आना रहेगा। First class, second class, third class आदमी रहेगा, सब कोई कभी अमीर नहीं बनेगा। नहीं, इसका जगत का नियम ही है, कहीं भी जाइए ये है। एक class वो फुटपाथ में लेटने वाला, दरिद्र बनने वाला वो है।
हम तो सारा पृथ्वी घूम रहे हैं। आप जानते हैं अमेरिका इतना बड़ा wealthy nation है, उधर न्यूयॉर्क में जाइए, Bowery Street है, तमाम फुटपाथ में लेटे हुए हैं, शराब पी कर। मोटर खड़ा हो गया, वो आ गया थोड़ा मोटर उसको साफ कर दिया, $1 उसको दे दिया। कोई गरीब समझ कर, उसी वक्त गया, एक बोतल ले आया, $1 का पिया। हजारों हैं, खाली एक शहर में नहीं, कोई भी शहर में जाइए अमेरिका में। ये है 'bum' उसको कहा जाता है। पैसा खुद मिलता है, अमेरिका में पैसा का कोई अभाव नहीं है। किसी का थोड़ा मोटर ऐसा कपड़ा से थोड़ा ऐसा साफ कर दीजिए, he gives immediately $1. $1 means Rs. 7.50. He has money, enough money, then why is he poor? इसको क्या जवाब? बोलिए।
ये जो poverty है, ये सारा दुनिया में है, खाली आपके भारतवर्ष में नहीं है। प्रकृति का जो काम होता है, सब जगह... एक पतित का... सर्व पतित का गुण जो है, वो सब जगह काम करता है। ये मत समझिए कि खाली भारतवर्ष में ही poor हैं। जहाँ धन का कोई अभाव ही नहीं है, रास्ता में धन गिरा हुआ है, उधर भी poverty है। क्यों है? उसका क्या जवाब है? बोलिए।
आप अगर समझते हैं धन होने से, पैसा होने से poverty सब मिट जाएगा, नहीं मिट सकता। जिसको भाग्य में poverty भोगना है, वो धनी का घर में जन्म होने से भी उसको भोगना पड़ेगा। जैसे एक आदमी धनी का घर में जन्म हुआ और बीमार है, तो वो धनी क्या अच्छा doctor और अच्छा medicine नहीं दे सकता? तो फिर वो क्यों बीमार रहता है?
ये अमेरिका में है, Titanic जहाज निकाला, guarantee जो 'यह जहाज कभी डूब नहीं सकता', और first voyage में ही डूब गया Atlantic में, आप लोग सब जानते हैं। तो कोई अच्छा जहाज बाँधने से डूबेगा नहीं, ऐसा कोई guarantee है क्या? दवाई होने से ही आदमी जी जाएगा, मरेगा नहीं, ऐसा कभी हो सकता है क्या? इसी प्रकार जो प्रतिविधि है, आप लोग सोचते हैं कि ये बीमार है, ये दुख है, इसकी प्रतिविधि ये है, वो प्रतिविधि कुछ काम का नहीं होगा जब तक भगवान की इच्छा नहीं होगी। बेकार है, ये इसका प्रमाण है। जब तक it is not sanctioned by the Supreme Will, you may present any kind of counteraction, the things will go on.
अभी जैसे बता रहे थे, अभी पानी है नहीं, उसमें भी दुर्भिक्ष है, और जब पानी हो जाएगा, उसमें भी दुर्भिक्ष। बोलिए, कागज आप अभी बतला रहे..."
वार्ताकार: "Explain, you just explain..."
श्रील प्रभुपाद: "गुजरात में तो ली दुखो दु वर्ष... ये जो प्रकृति का जो नियम होता है, जो पानी होने से भी दुख, पानी रहने से, नहीं रहने से भी दुख, इसको कैसे आप हटाइएगा? [गला साफ़ करने की आवाज़] इसलिए गीता में बताते हैं: 'प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः। अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥' सब प्रकृति से काम हो रही है, और जो मूर्ख है, वो समझते हैं 'हम कुछ कर लेंगे'।"
वार्ताकार: "आप ऐसे गरीबों को क्यों आपके अनुयायी नहीं बना देते हो? क्या ये आपने जो बोला कि हर शहर में गरीब हैं, हाँ, पैसे कमाते हैं और चले जाते हैं, वो गँवा देते हैं, हाँ, आप ऐसे लोगों को क्यों नहीं बनाते हो आपके followers?"
श्रील प्रभुपाद: "क्या आपका हुकुम मानना है क्या, जो गरीब को हमको बनाना है? आप क्यों नहीं बनाते हैं?"
वार्ताकार: "हम तो आपके स्थान पर नहीं हैं।"
श्रील प्रभुपाद: "तो हमारे सामने क्या गरीब को बनाना है क्या?"
वार्ताकार: "नहीं, आपने जो बोला, हाँ, ये सबको आप ये 'हरे राम हरे कृष्ण' का ये क्यों चलाते होंगे कि जो जहन्नुम में जाते हैं उनको जहन्नुम में... यानी बचाने के लिए बना रहे हो। ये सभी जहन्नुम जा रहा था, इसको बचाया।"
वार्ताकार: "नहीं, यानी यह social work है कि गरीब लोगों को आप समझाओ और वो लोग वहाँ से निकल कर आप में आ जावे, तो ये ऐसे सुखी हो जाएँ ना।"
श्रील प्रभुपाद: "हाँ, तो हम भी तो यही काम कर रहे हैं, आपको मालूम नहीं है।"
वार्ताकार: "हमें नहीं मालूम है, इसके लिए तो आपको पूछते हैं।"
श्रील प्रभुपाद: "हाँ, तो हम बताते हैं जो जितने गरीब हैं, दुखी हैं, सभी को हम बनाते हैं भगवत भक्त।"
वार्ताकार: "हाँ।"
श्रील प्रभुपाद: "आप क्यों समझते हैं आप गरीब नहीं हैं, दुखी नहीं हैं? आप भी आइए। आप क्यों समझते हैं आप गरीब नहीं हैं, दुखी नहीं हैं? बोलिए।"
वार्ताकार: "हम तो नहीं हैं गरीब, दुखी।"
श्रील प्रभुपाद: "[गला साफ़ करने की आवाज़] क्यों समझते हैं आप गरीब नहीं हैं?"
वार्ताकार: "हम नहीं... हमें satisfaction बहुत है।"
श्रील प्रभुपाद: "तो satisfaction तो गधा का भी होता है। Satisfaction तो गधा का भी होता है। [हंसी] दिन भर परिश्रम करता है, धोबी का कपड़ा लादता है, satisfaction है थोड़ा घास खा के। वो satisfaction क्या है? जब आप भी दिन भर परिश्रम करते हैं रोटी के लिए..."
वार्ताकार: "आप ठीक है, तो family की भी जिम्मेदारी होती है ना?"
श्रील प्रभुपाद: "हाँ, तो कोई भी कारण है, परिश्रम करना पड़ता है गधा के जैसा। वो भी satisfied है घास खा के। आप क्यों परिश्रम करते हो ये सब?"
वार्ताकार: "हाँ..."
श्रील प्रभुपाद: "हम भी भगवान के लिए... इतना ही तो फर्क है। आप family के लिए करते हैं, देश के लिए करते हैं, हम भगवान के लिए करते हैं। इतना ही तो फर्क है।"
वार्ताकार: "सब लोग अनुयायी क्यों नहीं बनते?"
श्रील प्रभुपाद: "इसीलिए मैंने बताया कि वो सब नहीं बन सकता है, भगवान का जब तक sanction नहीं हो। यही तो बोलता है कि गरीब होने से केवल उसको धनी बनाने के प्रयत्न करने से धनी नहीं बन सकता, जब तक भगवान की कृपा ना हो। यही तो हमारा कहने का मतलब है। इसलिए हम लोग कहते हैं कि 'Back to Godhead', ये हम लोग समझाएँगे। हम गरीब-अमीर का विचार नहीं करते। तुम्हारा जितना दुख है, उसको मिटाने के लिए भगवत भक्ति का अवलंबन करें, ये हम लोग का प्रयास है।"
वार्ताकार: "स्वामी जी, ऐसा है कि आपकी बात तो सच है कि जो गरीब हैं उनको तो यहाँ जो आपने..."
श्रील प्रभुपाद: "भाई, हमारा गरीब के लिए कोई मना नहीं है। आप समझते हैं आप धनी हैं, आपको आने की ज़रूरत नहीं है। जो समझता है कि हमको ज़रूरत है, वो आता है। हमारे लिए गरीब-अमीर का कोई विचार नहीं है।"
वार्ताकार: "नहीं, ये बात सच है आपकी। मगर आप जो आपका program चलता है, यहाँ जो program चलता है, वहाँ धन का आदमी आ सकता है, ऐसी impression है लोगों में।"
श्रील प्रभुपाद: "आप... लोगों का impression रहे तो मैं क्या करूँ?"
वार्ताकार: "नहीं, impression नहीं। वो महात्मा गांधी थे, वो झोपड़े में जाते थे, वहाँ जाके बैठते थे, खाना खाते थे, रहते थे और गरीब के बीच में काम करते थे। तो इसीलिए वो महात्मा बने हैं। पर आजकल क्या होता है कि कई महात्मा ऐसे होते हैं जो बंगले में रहते हैं।"
श्रील प्रभुपाद: "हम तो सबको गरीब समझते हैं, आपको भी गरीब समझते हैं।"
वार्ताकार: "उससे... वो तो आपकी बात..."
श्रील प्रभुपाद: "जिसके पास भगवत ज्ञान नहीं है, उससे दरिद्र और गरीब कोई हो ही नहीं सकता। महात्मा गांधी... महात्मा गांधी आपका ideal हो सकता है, बाकी हमारा ideal है कृष्ण।"
वार्ताकार: "नहीं, नहीं, ये भाई बताते हैं कि महात्मा गांधी ये जो गरीब की झोपड़ी में भी जाते थे उसका उद्धार करने के लिए, हाँ, आप क्या कुछ करते हो ऐसा?"
श्रील प्रभुपाद: "तब तो ये सभी गरीब की झोपड़ी में जाते हैं।"
वार्ताकार: "हाँ, तो बराबर हो गया, तब आप खुशी हैं?"
श्रील प्रभुपाद: "खुशी नहीं, हमारी खुशी इसमें कोई काम नहीं... ये तो लोग पढ़ेंगे कल, इसमें हमारी खुशी... movement के बारे में हमको बुलाया, आप जनता की जो... देखो, ये तो आपका introduction देने के लिए हमें बुलाया गया है, हम आज पूछना मन से नहीं चाहिए आपसे। Why is it restricted to a particular class and not to all the classes of the society?"
श्रील प्रभुपाद: "भाई, हम [गला साफ़ करने की आवाज़] जब अपना दरवाजा खोल दिया सबके लिए, तो गरीब आता नहीं क्यों?"
वार्ताकार: "नहीं, आपका... नहीं, ऐसा जवाब दिया। क्यों गरीब आता नहीं?"
श्रील प्रभुपाद: "हम तो किसी को मना नहीं किया।"
वार्ताकार: "ये इधर आने... इसमें कोई गरीब नहीं आएगा। स्वामी जी, अभी मैं पाँच गरीब आदमियों को बोलूँ, 'भाई, आप...' छोड़ दीजिए, वो नहीं आएगा इधर। हमारा जो मंडल है, आप साबरमती के किनारे पर जो झोपड़ा बाँधकर जो रह रहे होंगे, तो सब गरीब आपके पास आते।"
श्रील प्रभुपाद: "हम कहते हैं जो हम जो उधर मंडप खोल दिया है, तो उसमें ऐसे तो लिखा नहीं है कि गरीब के लिए नहीं है। ऐसे लिखा है कुछ?"
वार्ताकार: "नहीं, बहुत सी चीज़ नहीं लिखी होती है तो भी लोग पढ़ लेते हैं।"
श्रील प्रभुपाद: "फिर जबरदस्ती होता है। हमारा जब दरवाजा सबके लिए खुला है, तो क्यों आते नहीं?"
वार्ताकार: "उनके आने में झिझक होती है, पहली बात तो यह है।"
श्रील प्रभुपाद: "तो फिर उसको समझाइए, उनको क्यों नहीं जाते? वो तो आपका काम है, हमारा-तुम्हारा काम है। हम तो सबके लिए खोल दिया, तुम गरीब का advocate है, वहाँ जाके समझाओ।"
वार्ताकार: "नहीं करते स्वामी जी। स्वामी जी, यहाँ जगदीश मंदिर है, हाँ, वहाँ ये मंदिर ऐसा है कि वहाँ जो कोई आदमी खाने के टाइम पे जाते हैं, तो गरीब को... गरीब को भगवान की भक्ति भी कर सकते हैं और उनको खाना मिलता है वहाँ।"
श्रील प्रभुपाद: "हमारा सब मंदिर में ये चीज़ है।"
वार्ताकार: "जी हाँ?"
श्रील प्रभुपाद: "जितना मंदिर, सब में। तो ये मंदिर है, हमारा तो ये मंदिर नहीं है, ये तो temporary camp खुला है। और इसलिए इन लोग को मैं बोल भी रहा था, 'तुम्हारा खाने, प्रसाद वितरण का व्यवस्था क्यों नहीं किया?' तो हमारे सब मंदिर में, मंदिर का अर्थ यही होता है कि जो कोई आए उसको प्रसाद मिलेगा। यह हमारा 102 मंदिर जो है ना, सबके लिए खुला है और [गला साफ़ करने की आवाज़] जो आए उसको प्रसाद मिलेगा। यह मंदिर का नियम ही है। खाली जगदीश मंदिर नहीं, कहीं भी मंदिर है, यह नियम है। अभी हमारा मुंबई में जो मंदिर है, उधर जो कोई जाए प्रसाद मिलता है। हमारा कलकत्ता में जो मंदिर है, जो कोई..."
वार्ताकार: "प्रसाद अलग बात है, खाना अलग बात है।"
श्रील प्रभुपाद: "प्रसाद नहीं, बैठ के खाओ। और क्या खाना का क्या मतलब होता है?"
वार्ताकार: "तो पेट भर के खा सकते हैं?"
श्रील प्रभुपाद: "हाँ, वही तो बात है। संतोष होगा कि नहीं? हाँ, बैठ के बैठो, बैठ के खाओ, जितना खुशी।"
वार्ताकार: "अहमदाबाद में तो हमने कई मंदिर देखे, मगर एक ही मंदिर जगन्नाथ का देखा है जो उसी में ही मिल रहा है।"
श्रील प्रभुपाद: "तो खैर, वो मंदिर का ideal है। संबंध में ऐसी होनी चाहिए।"
वार्ताकार: "Exactly right. अच्छा, रशिया में आपका कोई center नहीं है?"
श्रील प्रभुपाद: "है। आपको [गला साफ़ करने की आवाज़] कैसे मालूम नहीं है?"
वार्ताकार: "नहीं, आपने जो बताया उसी पे से बोलते हैं। इसमें रशिया का नाम नहीं बताया। आपने जो बताया इसमें रशिया नहीं है।"
श्रील प्रभुपाद: "रशिया है, रशिया है।"
वार्ताकार: "कितने केंद्र हैं वहाँ?"
श्रील प्रभुपाद: "एक [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] है। एक है, मॉस्को में है।"
वार्ताकार: "अच्छा, government की ओर से कोई तकलीफ है वहाँ?"
श्रील प्रभुपाद: "बहुत है।"
वार्ताकार: "खास करके कौन सी... वो discussion करने का है तकलीफ?"
श्रील प्रभुपाद: "नहीं, कैसी तकलीफ है? वो लोग चाहते नहीं कोई भगवत कथा मॉस्को में हो।"
वार्ताकार: [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़]
श्रील प्रभुपाद: "वो तो जब हम रशिया में गया था, मॉस्को में, वो custom clearance में एक भगवत गीता हमारे बैग से निकला, तो पुलिस को बुला के ले आया। अब पुलिस बेचारी देख के कह दिया कि 'नहीं, ठीक है', नहीं तो शायद arrest कर ले। तो क्या किया, भगवत गीता किताब था, उसको देख के custom officer पुलिस को बुला के लाया। तो officer को बेचारे को मालूम नहीं होगा कि इसमें भगवान का सब literature है, नहीं कुछ है, तो ऐसी परिस्थिति। अच्छा, एक भगवत गीता देखने से पुलिस को बुला दिया! और हमारा आदमी बाजार में कोई चीज़ खरीदने को जाता था, तो detective पूछता है, 'What is your fetish? What is your fetish?' सब भाई... तो रशिया के विषय में... साल की बात है, वैसे ही 1971..."
वार्ताकार: "पब्लिश कर... पब्लिश करो रशिया में, भगवत गीताने स्थान पब्लिश करे..."
श्रील प्रभुपाद: "रशिया की बात मंजूर... क्या भगवान... नहीं, ये तो बात सही है, अभी तक प्रचार movement, underground movement, मंदिर underground, underground काम करे..."
वार्ताकार: "सर, जो भगवत गीता के बारे में custom का बताया आपने, वो कौन सी language में थी वो भगवत गीता?"
श्रील प्रभुपाद: "English. भगवत गीता में translation English बात थी।"
वार्ताकार: "सोल्जर ने गीता साथ माटे कृष्ण लड़ाई लड़ाई धर्म... underground लोगों... underground प्रार्थना करे... आप पब्लिश करिए, मुसीबत जाए... followers की संख्या कितनी होगी?"
श्रील प्रभुपाद: "102 केंद्र बनाए..."
वार्ताकार: "Followers की संख्या?"
श्रील प्रभुपाद: "बस समझ लीजिए, एक-एक केंद्र में 50 है।"
वार्ताकार: "अच्छा, दूसरा कुछ बताना होगा आपको?"
श्रील प्रभुपाद: "7 वर्ष में बनाया जाए..."
वार्ताकार: "अभी भी ऐसे... I am life में... I am follower, I am follower. How will you find out of followers?"
श्रील प्रभुपाद: "We have relaxed..."
वार्ताकार: "बराबर। हरे राम हरे कृष्णा movement जोरदार... पछी कपड़ा सन्यासी, सन्यासी तो लाख..."
श्रील प्रभुपाद: "I am speaking only सात वर्ष अंदर, सात वर्ष साधु पर मंदिर बनाए तो short time... मानी-सुनी बात... किताब बनाया, 20 सन्यासी, सन्यासी वाला सफेद कपड़ा, dedicated to this..."
वार्ताकार: "देवरने हमारे... हमारा एक follower है। ये लोग सारा दिन क्या करते हैं?"
श्रील प्रभुपाद: "Hari नाम जप करते हैं।"
वार्ताकार: "अच्छा, सारा दिन? और दूसरा कोई काम नहीं करते?"
वार्ताकार: "I don't belong to convert... convert..."
श्रील प्रभुपाद: "Convert करवा माटे... conversion... मान ग्रहण करो... surrender yourself to God. पण कृष्ण मानो, God मानो। अभी कृष्णा करता हो, कृष्णा बराबर एक वस्तु, God consciousness..."
वार्ताकार: "जो सन्यास ना... एक मिनट, सन्यास में जबरदस्त लानी छे के कृष्ण दुनिया में कोई भगवान नहीं... धर्म..."
श्रील प्रभुपाद: "₹3000 वस्तु आप... शंकर भगवान तो रोज शंकर भगवान पूजा मात्र... हरे कृष्ण हरे राम... पहला सवाल करो तो कृष्ण हिंदुस्तान में हरे कृष्ण के करे तो केज्म अमेरिका में... हिंदुस्तान में कारण के परदेश दूष कर आप धो... परदेश स अनाज आप ला धो, लाज सता... परदेश अनाज स... [हंसी] परदेश स हिंदुस्तान import करो, एक आप सरकार स्र परिस्थिति के..."
वार्ताकार: "स्वामी जी, LSD पर... जी, LSD छुटवा माटे कर movement... लोग अपना हरे कृष्णा करो, surrender करो तो छुट्टी... लोग consciousness... आप कॉलेज में LSD दाखिल थवा अनुभव... nature अनुभव... ना, अनुभव ज़रूर तो time..."
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥