vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना
»
श्लोक 3
श्लोक
7.98.3
स रुदित्वा चिरं कालं बहुशो बाष्पमुत्सृजन्।
क्रोधशोकसमाविष्टो रामो वचनमब्रवीत्॥ ३॥
अनुवाद
बहुत देर तक रोते हुए और बारम्बार आँसू बहाते हुए, क्रोध और शोक से भरे हुए श्री रामजी इस प्रकार बोले-॥3॥
Weeping for a long time and shedding tears repeatedly, filled with anger and grief, Sri Rama spoke thus -॥ 3॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd