श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.98.21 
उत्तरं नाम काव्यस्य शेषमत्र महायश:।
तच्छृणुष्व महातेज ऋषिभि: सार्धमुत्तमम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे महान् एवं यशस्वी श्री राम! इस काव्य के अंतिम भाग का नाम उत्तरकाण्ड है। ऋषियों के साथ उस उत्तम भाग को सुनो। 21॥
 
Great and glorious Shri Ram! The name of the last part of this poetry is Uttarkand. Listen to that best part with the sages. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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