श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.98.15 
स्वर्गे ते संगमो भूयो भविष्यति न संशय:।
अस्यास्तु परिषन्मध्ये यद् ब्रवीमि निबोध तत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अब तुम उनसे पुनः साकेतधाम में मिलोगे; इसमें संशय नहीं है। अब इस सभा में मैं जो कुछ कहता हूँ, उस पर ध्यान दो॥15॥
 
‘Now you will meet him again in Saket Dham; there is no doubt about this. Now pay attention to what I tell you in this meeting.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)