श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.97.11 
ततो वायु: शुभ: पुण्यो दिव्यगन्धो मनोरम:।
तं जनौघं सुरश्रेष्ठो ह्लादयामास सर्वत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दिव्य सुगन्ध से युक्त, मन को आनन्द देने वाले परम शुद्ध एवं शुभ वायुदेव मन्द गति से बहते हुए वहाँ के लोगों को सब ओर से आनन्द प्रदान करने लगे॥11॥
 
Thereafter, the most pure and auspicious Vayudev, full of divine fragrance, giving joy to the mind, flowing at a slow pace, started providing joy to the people there from all sides. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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