vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 96: महर्षि वाल्मीकि द्वारा सीता की शुद्धता का समर्थन
»
श्लोक 8
श्लोक
7.96.8
क्षत्रिया ये च शूद्राश्च वैश्याश्चैव सहस्रश:।
नानादेशगताश्चैव ब्राह्मणा: संशितव्रता:॥ ८॥
अनुवाद
वहाँ हजारों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र उपस्थित हुए, जो विभिन्न देशों से आये थे और कठोर व्रतों का पालन कर रहे थे।
Thousands of Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras, who had come from various countries and were observing strict vows, appeared there. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×