श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 96: महर्षि वाल्मीकि द्वारा सीता की शुद्धता का समर्थन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.96.19 
प्रचेतसोऽहं दशम: पुत्रो राघवनन्दन।
न स्मराम्यनृतं वाक्यमिमौ तु तव पुत्रकौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'रघुकुलनंदन! मैं प्रचेता (वरुण) का दसवाँ पुत्र हूँ। मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी झूठ बोला हो। मैं सत्य कहता हूँ, ये दोनों आपके पुत्र हैं।'
 
‘Raghukulanandan! I am the tenth son of Pracheta (Varun). I do not remember ever telling a lie. I am telling the truth, these two are your sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)