श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 96: महर्षि वाल्मीकि द्वारा सीता की शुद्धता का समर्थन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.96.14 
साधु रामेति केचित् तु साधु सीतेति चापरे।
उभावेव च तत्रान्ये प्रेक्षका: सम्प्रचुक्रुशु:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग कह रहे थे, ‘श्री राम, आप धन्य हैं।’ कुछ लोग कह रहे थे, ‘देवी सीता, आप धन्य हैं।’ और कुछ अन्य दर्शक भी थे जो सीता और राम दोनों की ऊँचे स्वर में प्रशंसा कर रहे थे॥ 14॥
 
Some were saying, 'Sri Rama, you are blessed.' Others were saying, 'Devi Sita, you are blessed.' And there were some other spectators too who were loudly praising both Sita and Rama.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)