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श्लोक 7.94.28  |
कृतानि गुरुणास्माकमृषिणा चरितं तव।
प्रतिष्ठा जीवितं यावत् तावत् सर्वस्य वर्तते॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| हमारे गुरु महर्षि वाल्मीकि ने इन सबकी रचना की है। उन्होंने आपके चरित्र को महाकाव्य का रूप दिया है। आपके जीवन के सभी पहलू इसमें समाहित हैं॥28॥ |
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| ‘Our Guru Maharshi Valmiki has created all of them. He has given your character the form of an epic. All the aspects of your life are included in it.॥ 28॥ |
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