श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 94: लव-कुश द्वारा रामायण-काव्य का गान तथा श्रीराम का उसे भरी सभा में सुनना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.94.2 
तां स शुश्राव काकुत्स्थ: पूर्वाचार्यविनिर्मिताम्।
अपूर्वां पाठॺजातिं च गेयेन समलंकृताम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी ने भी वह गान सुना, जो पूर्व आचार्यों द्वारा बताए गए नियमों के अनुसार था। वह संगीतात्मक विशेषताओं वाले स्वरों के गायन की एक अनोखी शैली थी॥ 2॥
 
Sri Raghunath ji also heard that song, which was in accordance with the rules given by the previous Acharyas. It was a unique style of singing the notes having musical characteristics.॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd