श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 94: लव-कुश द्वारा रामायण-काव्य का गान तथा श्रीराम का उसे भरी सभा में सुनना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.94.14 
ऊचु: परस्परं चेदं सर्व एव समाहिता:।
उभौ रामस्य सदृशौ बिम्बाद् बिम्बमिवोत्थितौ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वे सब एकाग्रचित्त होकर आपस में इस प्रकार बातें करने लगे - 'इन दोनों राजकुमारों का रूप श्री रामचन्द्रजी के समान ही है। वे मूर्ति में से प्रतिबिम्बों के समान प्रतीत होते हैं॥ 14॥
 
All of them became focused and started talking to each other in this manner - 'The appearance of these two princes is exactly like that of Shri Ramchandraji. They look like reflections appearing from the image.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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