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ramayan 7.93.9: ‘हे बच्चों! यहाँ के मीठे फल और मूल खाकर न तो तुम थकोगे और न तुम्हारे कंठ की मधुरता नष्ट होगी।॥9॥   |   ramayan सर्ग 7.93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.93.9 
न यास्यथ: श्रमं वत्सौ भक्षयित्वा फलान्यथ।
मूलानि च सुमृष्टानि न रागात् परिहास्यथ:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘हे बच्चों! यहाँ के मीठे फल और मूल खाकर न तो तुम थकोगे और न तुम्हारे कंठ की मधुरता नष्ट होगी।॥9॥
 
‘Children! By eating the sweet fruits and roots here, you will neither get tired nor will the sweetness of your throat be lost.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)