श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.93.6 
ऋषिवाटेषु पुण्येषु ब्राह्मणावसथेषु च।
रथ्यासु राजमार्गेषु पार्थिवानां गृहेषु च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘यह काव्य ऋषियों और ब्राह्मणों के तीर्थस्थानों पर, गलियों में, राजमार्गों पर तथा राजाओं के निवासस्थानों में भी गाया जाना चाहिए।॥6॥
 
‘This poem should be sung at the sacred places of sages and Brahmins, in the streets, on highways and also in the residences of kings.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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