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ramayan 7.93.4: राजा श्री राम और अनेक महर्षियों द्वारा पूजित और सम्मानित होकर महाबली आत्मज्ञानी महर्षि वाल्मीकि वहाँ अत्यंत सुखपूर्वक रहने लगे॥4॥   |   ramayan सर्ग 7.93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.93.4 
आसीत् सुपूजितो राज्ञा मुनिभिश्च महात्मभि:।
वाल्मीकि: सुमहातेजा न्यवसत् परमात्मवान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजा श्री राम और अनेक महर्षियों द्वारा पूजित और सम्मानित होकर महाबली आत्मज्ञानी महर्षि वाल्मीकि वहाँ अत्यंत सुखपूर्वक रहने लगे॥4॥
 
Being well worshipped and honoured by King Shri Ram and numerous great sages, the mighty, self-enlightened sage Valmiki lived there very happily. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)