श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.93.3 
शकटांश्च बहून् पूर्णान् फलमूलांश्च शोभनान्।
वाल्मीकिवाटे रुचिरे स्थापयन्नविदूरत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वाल्मीकि के सुन्दर घेरे के पास अन्न आदि से भरी हुई अनेक गाड़ियाँ खड़ी थीं। साथ ही, अच्छे-अच्छे फल और कंदमूल भी रखे हुए थे।
 
Many carts full of food grains etc. were parked near Valmiki's beautiful enclosure. Along with that, good fruits and roots were also kept there.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd