श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.93.18 
संदिष्टौ मुनिना तेन तावुभौ मैथिलीसुतौ।
तथैव करवावेति निर्जग्मतुररिंदमौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मुनि के ऐसा आदेश देने पर मिथिला की पुत्री सीता के शत्रुदमन के दोनों पुत्र ‘बहुत अच्छा, हम भी ऐसा ही करेंगे’ ऐसा कहते हुए वहाँ से चले गए॥18॥
 
Upon the sage giving these orders, both the sons of Shatrudaman, daughter of Mithila, Sita, left the place saying, 'Very well, we will do the same.' ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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