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ramayan 7.93.17: इस प्रकार बहुत सी आज्ञा देकर वरुणपुत्र परम उदार ऋषि वाल्मीकि चुप हो गए॥17॥   |   ramayan सर्ग 7.93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.93.17 
इति संदिश्य बहुशो मुनि: प्राचेतसस्तदा।
वाल्मीकि: परमोदारस्तूष्णीमासीन्महामुनि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बहुत सी आज्ञा देकर वरुणपुत्र परम उदार ऋषि वाल्मीकि चुप हो गए॥17॥
 
In this way, after giving many orders, Varun's son, the most generous sage Valmiki became silent. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)