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ramayan 7.93.16: अतः तुम दोनों भाई प्रसन्न और एकाग्रचित्त होकर प्रातःकाल ही वीणा पर मधुर स्वर में रामायण का गायन आरम्भ करो।’ 16॥   |   ramayan सर्ग 7.93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.93.16 
तद् युवां हृष्टमनसौ श्व: प्रभाते समाहितौ।
गायतं मधुरं गेयं तन्त्रीलयसमन्वितम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम दोनों भाई प्रसन्न और एकाग्रचित्त होकर प्रातःकाल ही वीणा पर मधुर स्वर में रामायण का गायन आरम्भ करो।’ 16॥
 
Therefore, both of you brothers, being happy and concentrated, start singing Ramayana in a melodious voice on the veena early morning itself.' 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)