श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.93.15 
आदिप्रभृति गेयं स्यान्न चावज्ञाय पार्थिवम्।
पिता हि सर्वभूतानां राजा भवति धर्मत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'यह काव्य प्रारम्भ से ही गाया जाना चाहिए। तुम लोगों को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जिससे राजा का अपमान हो; क्योंकि धर्म की दृष्टि से राजा ही समस्त प्राणियों का पिता है। 15॥
 
‘This poetry should be sung from the beginning. You people should not behave in such a way that will insult the king; Because from the point of view of religion the king is the father of all living beings. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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