Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.93.11: जैसे मैंने तुम्हें पहले भी रामायण के भिन्न-भिन्न श्लोकों वाले सर्ग सुनाने का आदेश दिया है, उसी प्रकार तुम प्रतिदिन मधुर वाणी से बीस-बीस सर्ग गाओ॥ 11॥ | ramayan सर्ग 7.93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे मैंने तुम्हें पहले भी रामायण के भिन्न-भिन्न श्लोकों वाले सर्ग सुनाने का आदेश दिया है, उसी प्रकार तुम प्रतिदिन मधुर वाणी से बीस-बीस सर्ग गाओ॥ 11॥
Just as I have instructed you earlier to recite the cantos of the Ramayana poem having different numbers of verses, in the same way you should sing twenty cantos each every day in a sweet voice.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥