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श्लोक 7.92.9  |
एवं सुविहितो यज्ञो ह्यश्वमेधो ह्यवर्तत।
लक्ष्मणेन सुगुप्ता सा हयचर्या प्रवर्तत॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार अश्वमेध यज्ञ का कार्य सुन्दर रीति से आरम्भ हो गया और लक्ष्मण के संरक्षण में अश्व लोक में भ्रमण का कार्य भी भलीभाँति सम्पन्न हो गया ॥9॥ |
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| In this way, the work of Ashwamedha Yagya started in a beautiful manner and under the protection of Lakshman, the work of traveling in the horse world was also completed well. 9॥ |
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