श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  7.91.2-3 
वसिष्ठं वामदेवं च जाबालिमथ काश्यपम्।
द्विजांश्च सर्वप्रवरानश्वमेधपुरस्कृतान्॥ २॥
एतान् सर्वान् समानीय मन्त्रयित्वा च लक्ष्मण।
हयं लक्षणसम्पन्नं विमोक्ष्यामि समाधिना॥ ३॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! मैं अश्वमेध यज्ञ करने वाले ब्राह्मणों में श्रेष्ठ एवं श्रेष्ठ वशिष्ठ, वामदेव, जाबालि और कश्यप आदि सभी द्विजों को बुलाऊँगा और उनसे परामर्श लेकर शुभ लक्षणों से युक्त उस अश्व को बड़ी सावधानी से छोड़ दूँगा॥2-3॥
 
Laxman! I will call all the Dwijas like Vashishtha, Vamdev, Jabali and Kashyap, the foremost and best among the brahmins who perform Ashvamedha Yagya, and after taking advice from them, I will release the horse endowed with auspicious traits with utmost care. 2-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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