श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.91.11 
विभीषणश्च रक्षोभि: कामगैर्बहुभिर्वृत:।
अश्वमेधं महायज्ञमायात्वतुलविक्रम:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘अत्यन्त बलवान विभीषण को भी सूचित करो कि वे अनेक राक्षसों के साथ, जो अपनी इच्छानुसार गति कर सकते हैं, हमारे महान अश्वमेध यज्ञ में पधारें।’॥11॥
 
‘Also inform the immensely powerful Vibhishana that he should come to our great Ashwamedha sacrifice along with many demons who can move as per their wish.’॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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