श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 90: अश्वमेध के अनुष्ठान से इला को पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.90.5 
च्यवनं भृगुपुत्रं च मुनिं चारिष्टनेमिनम्।
प्रमोदनं मोदकरं ततो दुर्वाससं मुनिम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भृगु पुत्र च्यवन मुनि, अरिष्टनेमि, प्रमोदन, मोदकर तथा दुर्वासा मुनि को भी आमंत्रित किया गया। 5॥
 
Bhrigu's son Chyavan Muni, Arishtanemi, Pramodan, Modakar and Durvasa Muni were also invited. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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