श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 90: अश्वमेध के अनुष्ठान से इला को पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.90.4 
पुरुषत्वं गते शूरे बुध: परमबुद्धिमान्।
संवर्तं परमोदारमाजुहाव महायशा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! जब इल को एक महीने तक पुरुषत्व प्राप्त हो गया, तब परम बुद्धिमान् एवं तेजस्वी बुद्ध ने परम दानी महात्मा संवर्त को बुलाया।
 
Valiant one! When Il had attained the state of a man for a month, then the most intelligent and illustrious Buddha called the most generous Mahatma Samvarta.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)