श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 90: अश्वमेध के अनुष्ठान से इला को पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.90.16-17h 
अथ यज्ञे समाप्ते तु प्रीत: परमया मुदा॥ १६॥
उमापतिर्द्विजान् सर्वानुवाच इलसंनिधौ।
 
 
अनुवाद
यज्ञ समाप्त होने पर भगवान उमापति परम आनन्द में भरकर वहाँ उपस्थित समस्त ब्राह्मणों से बोले -॥16 1/2॥
 
‘After the sacrifice was over Lord Umapati, filled with supreme bliss, said to all the Brahmins present there -॥ 16 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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