श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 90: अश्वमेध के अनुष्ठान से इला को पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.90.11 
कर्दमस्त्वब्रवीद् वाक्यं सुतार्थं परमं हितम्।
द्विजा: शृणुत मद्वाक्यं यच्छ्रेय: पार्थिवस्य हि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तब कर्दमजी ने पुत्र के लिए अत्यन्त हितकारी बात कही - 'ब्राह्मणो! मैं जो कुछ कहता हूँ, उसे तुम सब सुनो, जो इस राजा के लिए हितकर होगा।' 11.
 
Then Kardama said something very beneficial for the son - 'Brahmins! You all listen to what I say, which will be beneficial for this king. 11.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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