श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 90: अश्वमेध के अनुष्ठान से इला को पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.90.10 
ते सर्वे हृष्टमनस: परस्परसमागमे।
हितैषिणो बाह्लिपते: पृथग्वाक्यान्यथाब्रुवन्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘एक दूसरे से मिलकर सभी महर्षि प्रसन्न हो गए और बाह्लीक देश के स्वामी राजा इल को उनका कल्याण चाहने के लिए नाना प्रकार की सलाह देने लगे॥10॥
 
‘On meeting each other all the great sages became happy and began to give different kinds of advice to King Il, the lord of Bahlika country, seeking his welfare.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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