श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 89: बुध और इला का समागम तथा पुरुरवा की उत्पत्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.89.6 
अहं कामचरी सौम्य तवास्मि वशवर्तिनी।
प्रशाधि मां सोमसुत यथेच्छसि तथा कुरु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
"हे सज्जन सोमकुमार! मैं अपनी इच्छानुसार विचरण करने के लिए स्वतंत्र हूँ, किन्तु इस समय मैं आपकी आज्ञा का पालन कर रहा हूँ; अतः आप मुझे उचित सेवा के लिए आदेश दें और जैसा चाहें वैसा करें।" ॥6॥
 
"Gentle Somkumar! I am free to move about as I please, but at this time I am submitting myself to your command; therefore, order me for the appropriate service and do as you please." ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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