श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 89: बुध और इला का समागम तथा पुरुरवा की उत्पत्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.89.3 
सर्वास्ता विद्रुता दृष्ट्वा किन्नरीर्ऋषिसत्तम:।
उवाच रूपसम्पन्नां तां स्त्रियं प्रहसन्निव॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे सब किन्नरियाँ पर्वत के किनारे चली गईं। यह देखकर महामुनि बुध ने उस सुन्दरी से मुस्कुराते हुए कहा -॥3॥
 
All those Kinnaris went to the edge of the mountain. Seeing this, the great sage Budh smilingly said to that beautiful woman -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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