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श्लोक 7.89.22  |
मासं स स्त्री तदा भूत्वा रमयत्यनिशं सदा।
मासं पुरुषभावेन धर्मबुद्धिं चकार स:॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| एक मास तक वह स्त्री बनकर निरन्तर बुद्ध की संगति करता रहा और फिर एक मास तक पुरुष बनकर धर्म-अनुष्ठान में तत्पर रहा॥ 22॥ |
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| For one month he became a woman and continuously enjoyed the company of the Buddha. And then for one month he became a man and devoted himself to religious rituals.॥ 22॥ |
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