श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 89: बुध और इला का समागम तथा पुरुरवा की उत्पत्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.89.22 
मासं स स्त्री तदा भूत्वा रमयत्यनिशं सदा।
मासं पुरुषभावेन धर्मबुद्धिं चकार स:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
एक मास तक वह स्त्री बनकर निरन्तर बुद्ध की संगति करता रहा और फिर एक मास तक पुरुष बनकर धर्म-अनुष्ठान में तत्पर रहा॥ 22॥
 
For one month he became a woman and continuously enjoyed the company of the Buddha. And then for one month he became a man and devoted himself to religious rituals.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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