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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 89: बुध और इला का समागम तथा पुरुरवा की उत्पत्ति
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श्लोक 2
श्लोक
7.89.2
अथ राम: कथामेतां भूय एव महायशा:।
कथयामास धर्मात्मा प्रजापतिसुतस्य वै॥ २॥
अनुवाद
तत्पश्चात् महाधर्मात्मा श्री रामजी पुनः प्रजापति कर्दम के पुत्र इल की यह कथा इस प्रकार कहने लगे-॥2॥
Thereafter, the great religious person Shri Ram again started telling this story of Il, the son of Prajapati Kardam, in this manner – ॥ 2॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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