श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 89: बुध और इला का समागम तथा पुरुरवा की उत्पत्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.89.10 
सोऽपश्यत् सोमजं तत्र तपन्तं सलिलाशये।
ऊर्ध्वबाहुं निरालम्बं तं राजा प्रत्यभाषत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उसने देखा कि सोमपुत्र बुद्ध वहाँ तालाब में ध्यानमग्न हैं। उनकी भुजाएँ ऊपर उठी हुई हैं और वे बिना किसी सहारे के खड़े हैं। उस समय राजा ने बुद्ध से पूछा -॥10॥
 
‘He saw that Somputra Buddha was meditating in the pond there. His arms were raised upwards and he was standing without any support. At that time the king asked Buddha -॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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