Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.88.10: वह जल के भीतर घोर तपस्या में लीन था। उसे हराना किसी के लिए भी अत्यन्त कठिन था। वह यशस्वी, पूर्णतया संतुष्ट और यौवन अवस्था में था॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.88: इला और बुध का एक-दूसरे को देखना तथा बुध का उन सब स्त्रियोंको किंपुरुषी नाम देकर पर्वत पर रहने के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 88: इला और बुध का एक-दूसरे को देखना तथा बुध का उन सब स्त्रियोंको किंपुरुषी नाम देकर पर्वत पर रहने के लिये आदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.88.10 
तपन्तं च तपस्तीव्रमम्भोमध्ये दुरासदम्।
यशस्करं कामकरं तारुण्ये पर्यवस्थितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह जल के भीतर घोर तपस्या में लीन था। उसे हराना किसी के लिए भी अत्यन्त कठिन था। वह यशस्वी, पूर्णतया संतुष्ट और यौवन अवस्था में था॥10॥
 
‘He was engaged in intense penance under water. It was extremely difficult for anyone to defeat him. He was famous, completely satisfied and in his youthful state.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)