Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.87.5-6: हे सौम्य! रघुनन्दन! परम दानशील देवता, परम धनवान दैत्य और नाग, राक्षस, गन्धर्व और महामनस्वी यक्ष, ये सभी भयभीत होकर सदैव राजा की स्तुति और पूजा करते थे और जब वह महाबली राजा क्रोधित हो जाता था, तब तीनों लोकों के प्राणी भय से काँप उठते थे॥5-6॥ | ramayan सर्ग 7.87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे सौम्य! रघुनन्दन! परम दानशील देवता, परम धनवान दैत्य और नाग, राक्षस, गन्धर्व और महामनस्वी यक्ष, ये सभी भयभीत होकर सदैव राजा की स्तुति और पूजा करते थे और जब वह महाबली राजा क्रोधित हो जाता था, तब तीनों लोकों के प्राणी भय से काँप उठते थे॥5-6॥
Gentle! Raghunandan! The most generous gods, the most wealthy demons and the serpents, the demons, the Gandharvas and the great-minded Yakshas, all of them were fearful and always praised and worshiped the king, and when that great king became angry, the creatures of the three worlds trembled with fear. 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥