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ramayan 7.87.20-21h: जब महात्मा भगवान शंकर ने इस प्रकार पुरुषत्व देने से इनकार कर दिया, तब स्त्रीरूपधारी राजा इल शोक से व्याकुल हो गए। उन्होंने उन परम श्रेष्ठ महादेवजी से अन्य कोई वर स्वीकार नहीं किया। 20 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.87.20-21h 
तत: स राजा शोकार्त: प्रत्याख्यातो महात्मना॥ २०॥
स्त्रीभूतोऽसौ न जग्राह वरमन्यं सुरोत्तमात्।
 
 
अनुवाद
जब महात्मा भगवान शंकर ने इस प्रकार पुरुषत्व देने से इनकार कर दिया, तब स्त्रीरूपधारी राजा इल शोक से व्याकुल हो गए। उन्होंने उन परम श्रेष्ठ महादेवजी से अन्य कोई वर स्वीकार नहीं किया। 20 1/2॥
 
When Mahatma Lord Shankar refused to give manhood in this way, King Il, who took the form of a woman, became distraught with grief. He did not accept any other boon from that most excellent Mahadevji. 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)