vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति
»
श्लोक 19-20h
श्लोक
7.87.19-20h
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ राजर्षे कार्दमेय महाबल॥ १९॥
पुरुषत्वमृते सौम्य वरं वरय सुव्रत।
अनुवाद
"हे महाबली राजा कर्दमकुमार! उठो, उठो। हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले सज्जन राजा! पुरुषत्व को छोड़कर जो चाहो, वर मांग लो।" ॥19 1/2॥
"Kardamakumara, the mighty king! Get up, get up. A gentle king who observes the best vows! Ask for any boon you want, except manhood." ॥19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×