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ramayan 7.87.15-16h: वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि उस वन के सभी प्राणी, सर्प, पशु और पक्षी आदि स्त्रियों का रूप धारण कर चुके हैं। हे रघुनन्दन! उन्होंने अपने सेवकों सहित स्वयं को भी स्त्रियों के रूप में परिवर्तित देखा॥15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.87.15-16h 
स दृष्ट्वा स्त्रीकृतं सर्वं सव्यालमृगपक्षिणम्॥ १५॥
आत्मानं स्त्रीकृतं चैव सानुगं रघुनन्दन।
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि उस वन के सभी प्राणी, सर्प, पशु और पक्षी आदि स्त्रियों का रूप धारण कर चुके हैं। हे रघुनन्दन! उन्होंने अपने सेवकों सहित स्वयं को भी स्त्रियों के रूप में परिवर्तित देखा॥15 1/2॥
 
On reaching there he saw that all the living creatures of that forest including snakes, animals and birds had taken the form of women. O Raghunandan! He saw himself along with his servants transformed into women.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)