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ramayan 7.87.13: उस वन के विभिन्न भागों में जहाँ-जहाँ पुरुषरूपी पशु या वृक्ष थे, वे सब-के-सब स्त्रैण हो गए थे॥13॥   |   ramayan सर्ग 7.87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.87.13 
यत्र यत्र वनोद्देशे सत्त्वा: पुरुषवादिन:।
वृक्षा: पुरुषनामानस्ते सर्वे स्त्रीजना भवन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस वन के विभिन्न भागों में जहाँ-जहाँ पुरुषरूपी पशु या वृक्ष थे, वे सब-के-सब स्त्रैण हो गए थे॥13॥
 
Wherever there were masculine animals or trees in the various parts of that forest, all of them had become feminine.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)