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श्लोक 7.87.13  |
यत्र यत्र वनोद्देशे सत्त्वा: पुरुषवादिन:।
वृक्षा: पुरुषनामानस्ते सर्वे स्त्रीजना भवन्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| उस वन के विभिन्न भागों में जहाँ-जहाँ पुरुषरूपी पशु या वृक्ष थे, वे सब-के-सब स्त्रैण हो गए थे॥13॥ |
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| Wherever there were masculine animals or trees in the various parts of that forest, all of them had become feminine.॥ 13॥ |
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