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ramayan 7.87.12: भगवान उमावल्लभ, जिनकी ध्वजा पर वृषभ का चिह्न अंकित है, देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए स्त्री रूप में प्रकट होकर पर्वतीय झरने के पास उनके साथ क्रीड़ा करते थे॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 87: श्रीराम का लक्ष्मण को राजा इल की कथा सुनाना – इल को एक-एक मासतक स्त्रीत्व और पुरुषत्व की प्राप्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.87.12 
कृत्वा स्त्रीरूपमात्मानमुमेशो गोपतिध्वज:।
देव्या: प्रियचिकीर्षु: संस्तस्मिन् पर्वतनिर्झरे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भगवान उमावल्लभ, जिनकी ध्वजा पर वृषभ का चिह्न अंकित है, देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए स्त्री रूप में प्रकट होकर पर्वतीय झरने के पास उनके साथ क्रीड़ा करते थे॥12॥
 
Lord Umavallabh, whose flag bears the symbol of a bull, used to manifest himself in the form of a woman and play with Goddess Parvati near the mountain waterfall, in order to please her.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)