श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 86: इन्द्र के बिना जगत् में अशान्ति तथा अश्वमेध के अनुष्ठान से इन्द्र का ब्रह्महत्या से मुक्त होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.86.14 
भूम्यामहं सर्वकालमेकेनांशेन सर्वदा।
वसिष्यामि न संदेह: सत्येनैतद् ब्रवीमि व:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
“दूसरे भाग से मैं सदैव पृथ्वी पर निवास करूँगा; इसमें कोई संदेह नहीं है; मैं तुमसे सत्य कहता हूँ।” ॥14॥
 
"From the other part, I will always reside on the earth at all times; there is no doubt about this; I am telling you the truth." ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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