श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 86: इन्द्र के बिना जगत् में अशान्ति तथा अश्वमेध के अनुष्ठान से इन्द्र का ब्रह्महत्या से मुक्त होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.86.13 
एकेनांशेन वत्स्यामि पूर्णोदासु नदीषु वै।
चतुरो वार्षिकान् मासान् दर्पघ्नी कामचारिणी॥ १३॥
 
 
अनुवाद
(उसने कहा -) 'मैं अपने अंश से वर्षा ऋतु में चार महीने तक जल से भरी हुई नदियों में निवास करूँगी। उस समय मैं अपनी इच्छानुसार विचरण करूँगी और दूसरों का अभिमान नष्ट करूँगी।॥13॥
 
(She said -) 'With a part of myself I will reside in the rivers filled with water for four months during the rainy season. During that time I will be free to roam as per my wish and will destroy the pride of others.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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