श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 86: इन्द्र के बिना जगत् में अशान्ति तथा अश्वमेध के अनुष्ठान से इन्द्र का ब्रह्महत्या से मुक्त होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.86.11 
ते तामूचुस्ततो देवास्तुष्टा: प्रीतिसमन्विता:।
चतुर्धा विभजात्मानमात्मनैव दुरासदे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर देवता प्रसन्न और संतुष्ट हो गए और उससे बोले - 'हे ब्रह्मा की दुर्दांत हत्यारी! तुम अपने को चार भागों में विभाजित कर लो।'
 
On hearing this the gods became pleased and satisfied and said to her - 'O formidable killer of Brahma! Divide yourself into four parts.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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