श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 86: इन्द्र के बिना जगत् में अशान्ति तथा अश्वमेध के अनुष्ठान से इन्द्र का ब्रह्महत्या से मुक्त होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.86.1 
तदा वृत्रवधं सर्वमखिलेन स लक्ष्मण:।
कथयित्वा नरश्रेष्ठ: कथाशेषं प्रचक्रमे॥ १॥
 
 
अनुवाद
उस समय वृत्रासुर के वध का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाकर पुरुषोत्तम लक्ष्मण शेष कथा इस प्रकार कहने लगे-॥1॥
 
At that time, after narrating the entire story of the killing of Vritrasura, the best of men, Lakshmana, started telling the rest of the story in this way -॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd