श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 85: भगवान् विष्णु के तेज का इन्द्र और वज्र आदि में प्रवेश, इन्द्र के वज्र से वृत्रासुर का वध तथा ब्रह्महत्याग्रस्त इन्द्र का अन्धकारमय प्रदेश में जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.85.6 
त्रेधाभूतं करिष्यामि आत्मानं सुरसत्तमा:।
तेन वृत्रं सहस्राक्षो वधिष्यति न संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
"श्रेष्ठों में श्रेष्ठ! मैं अपने रूप के तेज को तीन भागों में विभाजित करूँगा, जिससे इन्द्र निःसंदेह वृत्रासुर का वध कर देंगे ॥6॥
 
“The best of the best! I will divide the glory of my form into three parts, through which Indra will undoubtedly kill Vritrasura. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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