श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 85: भगवान् विष्णु के तेज का इन्द्र और वज्र आदि में प्रवेश, इन्द्र के वज्र से वृत्रासुर का वध तथा ब्रह्महत्याग्रस्त इन्द्र का अन्धकारमय प्रदेश में जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.85.3 
सहस्राक्षवच: श्रुत्वा सर्वेषां च दिवौकसाम्।
विष्णुर्देवानुवाचेदं सर्वानिन्द्रपुरोगमान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
"भगवन्! सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र तथा सम्पूर्ण देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने इन्द्र तथा अन्य सम्पूर्ण देवताओं से इस प्रकार कहा -॥3॥
 
"Lord! After listening to the prayer of the thousand-eyed Indra and all the gods, Lord Vishnu said to Indra and all the other gods in this manner -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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