श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 85: भगवान् विष्णु के तेज का इन्द्र और वज्र आदि में प्रवेश, इन्द्र के वज्र से वृत्रासुर का वध तथा ब्रह्महत्याग्रस्त इन्द्र का अन्धकारमय प्रदेश में जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.85.22 
एवं संदिश्य तां वाणीं देवानां चामृतोपमाम्।
जगाम विष्णुर्देवेश: स्तूयमानस्त्रिविष्टपम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को अमृतमयी वाणी द्वारा उपर्युक्त संदेश देकर भगवान विष्णु उनकी स्तुति सुनते हुए परमधाम को चले गए॥22॥
 
After giving the above message to the gods through nectar-filled speech, Lord Vishnu, listening to his praises, went to the supreme abode. 22॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे पञ्चाशीतितम: सर्ग:॥ ८५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें पचासीवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८५॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd