श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 85: भगवान् विष्णु के तेज का इन्द्र और वज्र आदि में प्रवेश, इन्द्र के वज्र से वृत्रासुर का वध तथा ब्रह्महत्याग्रस्त इन्द्र का अन्धकारमय प्रदेश में जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.85.1 
लक्ष्मणस्य तु तद् वाक्यं श्रुत्वा शत्रुनिबर्हण:।
वृत्रघातमशेषेण कथयेत्याह सुव्रत॥ १॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का संहार करने वाले लक्ष्मण की यह बात सुनकर श्री राम ने कहा, 'हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले सुमित्रापुत्र! वृत्रासुर के वध का सम्पूर्ण वृत्तांत मुझसे कहिए।'
 
On hearing this statement of Lakshmana, the slayer of enemies, Sri Rama said, 'O son of Sumitra, who observes the best fast, tell me the entire story of the killing of Vritrasura.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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